Hindi debate - Social media ban for children up to 16 years

आदरणीय शिक्षक और विद्यार्थी मित्रों ,

आज, मै "सोलह साल तक के किशोरों के लिए सामाजिक माध्यमों के प्रयोग पर पूरी तरह से निर्बंध लगाने" के विचार के विरोध में मजबूती से खड़ी हूँ |  इस विषय में पूरी तरह से पाबन्दी लगाना ना तो व्यावहारिक है और ना ही लंबे समय के दौरान फायदेमंद। 

सामाजिक माध्यम आज की दुनिया में संवाद का सबसे महत्वपूर्ण साधन है। इस माध्यम से किशोर आपस में बातचीत करते है और जुड़े रहते है। नई चीजों के बारे में सीखते भी है। इस पर पूरी तरह से निर्बंध लगाने से किशोर अलग-थलग पड़ जायेंगे। उनकी सामाजिक जिंदगी में रूकावट आ सकती है। 

सामाजिक माध्यम जानकारी हासिल करने का और नई कला सीखने का एक ताकतवर साधन है। किशोर वयीन बच्चे इसका इस्तेमाल छायाचित्रण, संगीत, बागवानी एवं नृत्य ऐसी पाठ्येतर गतिविधियाँ जानने के लिए करते है। उनके शौक और जिज्ञासा को समझने का यहाँ अवसर मिलता है। इस पर रोक लगाना मतलब कुछ ऐसा है, जैसे उनसे कहना की आप पुस्तकालय नहीं जा सकते क्यों की कुछ किताबें नुकसानदायक हो सकती है। 

सम्पूर्ण निर्बंध लगाना व्यावहारिक उपाय नहीं हो सकता।  कई बार पाबंदियाँ असल में काम नहीं करती। आज-कल के बच्चे आधुनिक तकनीकियों के बारे में माहिर होते है। निर्बंध लगाने से वो सिर्फ असुरक्षित विकल्पों के तरफ धकेल दिये जायेंगे। फिर तो माता-पिता की निगरानी भी असफल हो सकती है। इससे जोखिम और बढ़ सकती है। 

मैं "समझदारी" के मुद्दे पर भी बात कहना चाहूँगी। कुछ किशोर १४-१५ की आयु में स्वतंत्र और समझदार हो जाते है तो कुछ किशोरों को  १८-१९ की आयु में भी सहायता की जरुरत पड़ सकती है। इस विषय में पर्याप्त उम्र सरकार या कोई संस्था तय नहीं कर सकती। बच्चों के माता-पिता ही उनकी तैयारी और समझ का सही अंदाज़ा लगा सकते है। 

सबसे जरुरी बात यह है की हमें सामाजिक माध्यमों की जानकारी और साक्षरता पर ध्यान देना चाहिए। सारे दरवाजे बंद करने के बजाय, उनसे सुरक्षित रूप से गुजरने की सीख देनी चाहिए। 

नुकसानदायक जानकारी और सही ज्ञान इसमें फरक समझना, निजी जिंदगी और गोपनीयता को सुरक्षित रखना, समय का सही संतुलन बनाए रखना सीखना चाहिए। 

नैतिक जिम्मेदारी और जागरूकता ही किशोरों को सशक्त बनाती है। 

हड़बड़ी में लगाई पाबंदियाँ कुछ समय के लिए सुरक्षा का भ्रम पैदा कर सकती है, लेकिन जागरूकता, और समझ ही लम्बे समय में एक किशोर को जिम्मेदार नागरिक बना सकता है।   

अंत में, सामाजिक माध्यम को शत्रुता कि नजर से नहीं, बल्कि सतर्कता से इस्तेमाल करने का साधन समझे तो उचित होगा। इसके दुरुपयोग को रोकने का सबसे अच्छा तरीका "निर्बंध" नहीं, बल्कि "ज्ञान का प्रबंध" इस आधार पर होना चाहिए। 

धन्यवाद। 

- किमया चिटणीस 

कक्षा 7 B 


 

Comments

Popular posts from this blog

marathi article - the serpent's revenge book review

Shivjayanti Speech 2026